• Cart
  • Checkout
  • Home
    • आमच्याविषयी
  • My account
  • Services
  • Shop
AgroWorld
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर
    • वंडरवर्ल्ड
    • महिला व बालकल्याण
    • आरोग्य टिप्स
No Result
View All Result
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर
    • वंडरवर्ल्ड
    • महिला व बालकल्याण
    • आरोग्य टिप्स
No Result
View All Result
AgroWorld
No Result
View All Result
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर

मेडिसिनल प्लांट फार्मिंग: किसानों के लिए खुशहाली की नई चाबी

निमच मंडी - एशिया का सबसे बडा मेडिसिनल प्लांट मार्केट

टीम ॲग्रोवर्ल्ड by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
February 10, 2026
in तंत्रज्ञान / हायटेक
0
मेडिसिनल प्लांट फार्मिंग
Share on WhatsappShare on Facebook
ADVERTISEMENT

ग्लोबल मार्केट में आयुर्वेद, नेचुरोपैथी और नेचुरल प्रोडक्ट्स की बढ़ती डिमांड ने इंडियन एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक मौका दिया है। ऐसे समय में जब किसान ट्रेडिशनल फसलों की अनिश्चित मार्केट कीमतों के कारण फाइनेंशियल संकट का सामना कर रहे हैं, मेडिसिनल प्लांट फार्मिंग एक फायदेमंद विकल्प के तौर पर उभर रही है। एक एग्रीकल्चर पॉलिसी एक्सपर्ट के तौर पर इस बदलाव को देखने पर यह साफ है कि यह सिर्फ क्रॉपिंग पैटर्न में बदलाव नहीं है, बल्कि एक ‘वैल्यू-एडेड क्रांति’ है जो ग्रामीण इकॉनमी को मजबूत करेगी।

मेडिसिनल प्लांट फार्मिंग से किसानों की इनकम दो से तीन गुना बढ़ सकती है। हालांकि, किसानों के लिए इंटरनेट, यूट्यूब पर अविश्वसनीय सोर्स और खासकर ‘बाय-बैक गारंटी’ देने वाले फ्रॉड एडवर्टाइजमेंट से मिलने वाली आधी-अधूरी जानकारी से सावधान रहना बहुत जरूरी है। इस फील्ड में सफल होने के लिए टेक्निकल एक्यूरेसी और मार्केट इंटेलिजेंस जरूरी है।

7 सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद मेडिसिनल फ़सलें और उनकी इकोनॉमिक्स
मेडिकल फ़सलें चुनते समय, सिर्फ़ उनके प्रॉफ़िट के बारे में ही नहीं, बल्कि उनकी टेक्निकल बारीकियों और क्वालिटी को समझना भी ज़रूरी है। नीचे दी गई 7 फ़सलों की इकोनॉमिक्स एशिया के नंबर 1 मेडिसिनल मार्केट में बेंचमार्क कीमतों पर आधारित है:

सफ़ेद मूसली: इसे 1 से 30 जून के बीच लगाया जाता है। एक एकड़ में 20 क्विंटल गीली मूसली मिलती है, जिसे प्रोसेस करने के बाद 4 क्विंटल अच्छी क्वालिटी का सूखा माल मिलता है। 50,000 से 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर, एक एकड़ से लगभग 4 से 5 लाख रुपये का नेट प्रॉफ़िट मिल सकता है।

शतावरी: यह 24 महीने की फ़सल है और इसकी ‘येलो नेपाली’ वैरायटी सबसे ज़्यादा पॉपुलर है। इससे प्रति एकड़ 20 क्विंटल सूखी जड़ें मिलती हैं। 29,000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 24 महीने में 5.80 लाख रुपये यानी सालाना 2.90 लाख रुपये की इनकम होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस फसल को जानवर नहीं खाते हैं।

सहजन (शेवगा): बेहतर किस्में PKM1, PKM2 और ODC3 6 महीने में प्रोडक्शन देती हैं। इसकी फली के साथ-साथ इसकी पत्ती के पाउडर का अफ्रीकी देशों में एक्सपोर्ट का बड़ा मौका है। चूंकि इसके सभी हिस्से मेडिसिनल हैं, इसलिए यह ‘जीरो वेस्ट’ फसल है।

अश्वगंधा: यह रबी सीजन की एक ज़रूरी फसल है। इनकम ग्रेडिंग के हिसाब से तय होती है।

*’A’ ग्रेड (बहुत अच्छी क्वालिटी): 25,000 रुपये प्रति क्विंटल।

*’B’ ग्रेड (मीडियम क्वालिटी): 20,000 रुपये प्रति क्विंटल।

*’C’ ग्रेड (ऑर्डिनरी क्वालिटी): 10,000 रुपये प्रति क्विंटल। इस एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स के हिसाब से, एक एकड़ में 60,000 से 90,000 रुपये तक की कमाई हो सकती है।

 

 

अग्निशिखा (कलिहारी): एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों में इस्तेमाल होने वाली यह फसल बहुत कीमती है। इससे प्रति एकड़ 120 से 140 kg बीज मिलते हैं। कम से कम 3,000 से 4,000 रुपये प्रति kg के दाम पर यह 5 महीने में 3.60 से 4.20 लाख रुपये की इनकम देती है। इसके लिए मिट्टी का pH 5.5 से 6 होना चाहिए।

हल्दी और अदरक: अगर ये फसलें मिट्टी में लंबे समय तक रहती हैं, तो इनके मेडिसिनल गुण बढ़ जाते हैं। अगर इन्हें बेचने के बजाय कच्चा प्रोसेस करके बेचा जाए, तो प्रॉफिट दोगुना हो जाता है।

कैलोट्रोपिस: जिसे हम खरपतवार समझते हैं, वह असल में ‘मिलियन डॉलर खरपतवार’ है। इसके फूलों का इस्तेमाल अस्थमा और स्किन की बीमारियों की होम्योपैथिक दवाओं में होता है। राजस्थान जैसे इलाकों में जहां कुछ नहीं उगता, वहां यह लगातार इनकम दे सकता है।

नीमच मंडी: एशिया का सबसे बड़ा मेडिसिनल प्लांट मार्केट
मध्य प्रदेश में नीमच मंडी मेडिसिनल प्लांट के ट्रेड के लिए सबसे ज़रूरी स्ट्रेटेजिक हब है। लोकल बिचौलियों के शोषण से बचने के लिए, किसानों के लिए अपना सामान सीधे नीमच मंडी ले जाना फायदेमंद है। यहां सभी 7 तरह की मेडिसिनल फसलें और दुर्लभ जड़ी-बूटियां अच्छे दाम पर मिलती हैं। अगर हम ट्रेन से आने-जाने के खर्च और वहां होने वाले बढ़े हुए मुनाफे को बैलेंस करें, तो डायरेक्ट सेलिंग किसान के फाइनेंशियल फायदे में है।

आयुष मंत्रालय और नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (NMPB) का सपोर्ट
भारत सरकार ने नवंबर 2000 में नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (NMPB) बनाया था। यह बोर्ड जंगलों की घटती संख्या और बढ़ती ग्लोबल डिमांड के बीच के गैप को भरने का काम करता है।

मार्केटप्लेस: भारत में मेडिसिनल प्लांट का मार्केट अभी 8,000 करोड़ रुपये का है।
सरकारी मदद: NMPB अलग-अलग स्कीम के तहत खेती, बचाव और रिसर्च के लिए फाइनेंशियल मदद देता है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती से कमर्शियल मेडिसिनल खेती की ओर जाने के लिए टेक्निकल ताकत मिलती है।

 

 

निष्कर्ष और गाइडलाइन
मेडिसिनल पौधों की खेती एक सस्टेनेबल भविष्य की ओर एक ज़रूरी कदम है। जो किसान इच्छुक हैं, उन्हें ये बातें माननी चाहिए:

टेक्निकल गाइडेंस: खेती से पहले, CSIR-CIMAP, लखनऊ जैसे मान्यता प्राप्त संस्थानों से संपर्क करें।
मिट्टी की टेस्टिंग: 5.5 से 6 के बीच की मिट्टी का pH मेडिसिनल फसलों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
बिज़नेस का तरीका: सिर्फ़ फसल लगाना ही नहीं, बल्कि ग्रेडिंग और प्राइमरी प्रोसेसिंग भी इन्वेस्टमेंट पर ज़्यादा से ज़्यादा रिटर्न (ROI) देती है।

सही जानकारी, सरकारी मदद और ध्यान से मार्केट प्लानिंग के साथ, मेडिसिनल पौधों की खेती सच में भारतीय किसान को अमीर बना सकती है।

 

 

तुम्हाला हेही वाचायला नक्की आवडेल. 

  • फेब्रुवारी महिन्यात करावयाची शेतीची कामे
  • फेब्रुवारी महिन्यात ड्रिप सिंचनाचा वापर का महत्त्वाचा?

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Click to share on X (Opens in new window) X
Tags: Medicinal Plant FarmingNational Medicinal Plants BoardNeemach Market
Previous Post

फेब्रुवारी महिन्यात करावयाची शेतीची कामे

Next Post

खारट जमिनीत फुलली सेंद्रिय शेतीची सुवर्णकथा

Next Post
खारट जमिनीत फुलली सेंद्रिय शेतीची सुवर्णकथा

खारट जमिनीत फुलली सेंद्रिय शेतीची सुवर्णकथा

ताज्या बातम्या

भारतात खत टंचाई

वाईट बातमी! आखातातून ३०,००० टन युरिया भारतात घेऊन येणारे जहाज रद्द

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
May 13, 2026
0

फोटोपिरियड कंट्रोल' तंत्रज्ञान

फोटोपिरियड कंट्रोल’ तंत्रज्ञान: आधुनिक शेती आणि पशुपालनातून भरघोस उत्पन्नाची गुरुकिल्ली

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 23, 2026
0

शेतकऱ्यांनो, युरिया खताला पर्यायी मार्ग शोधा; कृषिमंत्र्यांचे आवाहन

शेतकऱ्यांनो, युरिया खताला पर्यायी मार्ग शोधा; कृषिमंत्र्यांचे आवाहन

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 22, 2026
0

एल निनो

चीनचा ‘एल निनो’ इशारा: यंदा विक्रमी उष्णता आणि पावसाचे संकट; भात पिकाला मोठा धोका!

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 22, 2026
0

अस्सल देवगड हापूस

अस्सल देवगड हापूस – ॲग्रोवर्ल्डतर्फे नाशिक, धुळे येथे 25 एप्रिल (शनिवारी) तर जळगाव, भुसावळ, शहादा व छ. संभाजीनगर येथे 26 एप्रिल (रविवारी) ला… (90 पेटी उपलब्ध)

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 22, 2026
0

बीटी कॉटन

राजस्थानमध्ये ‘बीटी कॉटन’ विक्रीला मंजुरी

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 22, 2026
0

मुंबईच्या सिमेंटच्या जंगलात आता बहरणार भाजीपाल्याचे मळे!

मुंबईच्या सिमेंटच्या जंगलात आता बहरणार भाजीपाल्याचे मळे !

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 21, 2026
0

आयएमडी

नाशिकसह राज्यातील सहा जिल्ह्यांत पावसाचा इशारा; आयएमडीचा ‘यलो अलर्ट’

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 18, 2026
0

8 हजार वर्षांपूर्वी लागलेल्या ‘आगीच्या तांडवा’मुळे माणूस शेतकरी बनला; इस्रायली शास्त्रज्ञांचा दावा

8 हजार वर्षांपूर्वी लागलेल्या ‘आगीच्या तांडवा’मुळे माणूस शेतकरी बनला; इस्रायली शास्त्रज्ञांचा दावा

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 20, 2026
0

ऑरगॅनिक फार्मिंग

‘साराभाई’च्या ‘रोशेस’ने ऑरगॅनिक फार्मिंगमध्ये गमावले २ कोटी रुपये!

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 17, 2026
0

तांत्रिक

पॉवर वीडर : तण व्यवस्थापनासाठी प्रभावी यंत्र

पॉवर वीडर : तण व्यवस्थापनासाठी प्रभावी यंत्र

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
March 6, 2026
0

स्पायरल सेपरेटर

मळणीनंतर सोयाबीन व तूर साफसफाईसाठी- स्पायरल सेपरेटर

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
December 22, 2025
0

प्रिसिजन फार्मिंग

काय आहे प्रिसिजन फार्मिंग ? ; जाणून घ्या…

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
July 3, 2025
0

पार्सली भाजी काय आहे ?

200 रुपये किलोची पार्सली भाजी काय आहे ? जाणून घ्या…

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
May 20, 2025
0

जगाच्या पाठीवर

भारतात खत टंचाई

वाईट बातमी! आखातातून ३०,००० टन युरिया भारतात घेऊन येणारे जहाज रद्द

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
May 13, 2026
0

फोटोपिरियड कंट्रोल' तंत्रज्ञान

फोटोपिरियड कंट्रोल’ तंत्रज्ञान: आधुनिक शेती आणि पशुपालनातून भरघोस उत्पन्नाची गुरुकिल्ली

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 23, 2026
0

शेतकऱ्यांनो, युरिया खताला पर्यायी मार्ग शोधा; कृषिमंत्र्यांचे आवाहन

शेतकऱ्यांनो, युरिया खताला पर्यायी मार्ग शोधा; कृषिमंत्र्यांचे आवाहन

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 22, 2026
0

एल निनो

चीनचा ‘एल निनो’ इशारा: यंदा विक्रमी उष्णता आणि पावसाचे संकट; भात पिकाला मोठा धोका!

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
April 22, 2026
0

मुख्य कार्यालय

ॲग्रोवर्ल्ड
दुसरा मजला,बालाजी संकुल,
खाँजामिया चौक, जळगाव 425001

संपर्क :  9130091621/22/23/24/25

विभागीय कार्यालय- पुणे

ॲग्रोवर्ल्ड
बी- 507, अवंती अपार्टमेंट, सर्वे.नं. 79/2, भुसारी कॉलनीच्या डाव्या बाजूला, पौंड रोड, कोथरूड डेपो, पुणे- 411038

संपर्क : 9130091633

विभागीय कार्यालय- नाशिक

ॲग्रोवर्ल्ड

तळमजला,  प्रतिक अपार्टमेंट, गणपती मंदिर शेजारी,  सावरकर नगर, गंगापूर रोड, नाशिक- 422222

संपर्क :  9130091623

विभागीय कार्यालय- संभाजीनगर (औरंगाबाद )

ॲग्रोवर्ल्ड

शॉप क्र : 120,
कैलाश मार्केट, पदमपुरा सर्कल,
रेल्वे स्टेशन रोड,
संभाजीनगर (औरंगाबाद ) – 431005
संपर्क : 9175050178

  • Cart
  • Checkout
  • Home
  • My account
  • Services
  • Shop

© 2020.

No Result
View All Result
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर
    • वंडरवर्ल्ड
    • महिला व बालकल्याण
    • आरोग्य टिप्स

© 2020.

EnglishEnglish