• Cart
  • Checkout
  • Home
    • आमच्याविषयी
  • My account
  • Services
  • Shop
AgroWorld
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर
    • वंडरवर्ल्ड
    • महिला व बालकल्याण
    • आरोग्य टिप्स
No Result
View All Result
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर
    • वंडरवर्ल्ड
    • महिला व बालकल्याण
    • आरोग्य टिप्स
No Result
View All Result
AgroWorld
No Result
View All Result
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर

इतिहास के अनदेखे योद्धा – 2 : वीरांगना रामप्यारी गुर्जर — तैमूर लंग को धूल चटानेवाली योद्धा

टीम ॲग्रोवर्ल्ड by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
March 28, 2026
in इतर
0
वीरांगना रामप्यारी गुर्जर
Share on WhatsappShare on Facebook
ADVERTISEMENT

विक्रांत पाटील

इतिहास की किताबें खोलिए।
तैमूर लंग, समरकंद का वो क्रूर आक्रांता जिसने सन् 1398 में भारत पर आक्रमण कर नसीरुद्दीन तुगलक को हरा दिया। दिल्ली में लाखों लोगों की हत्या कर उनके सिरों का पहाड़ बनाकर जीत का खूनी जश्न मनाया।
यही पढ़ाया गया। बस यही।
लेकिन इसी कहानी का एक दूसरा पन्ना है — जिसे जानबूझकर फाड़ दिया गया।
भारतवर्ष में एक ऐसी वीरांगना थी जिसने युद्ध में न सिर्फ तैमूर लंगड़े को उसी की भाषा में जवाब दिया, बल्कि इस वीरांगना के युद्ध कौशल से डर कर तैमूर लंगड़े को भारत विजय का अभियान छोड़कर भागना पड़ा। उस वीर बाला गुर्जर क्षत्राणी का नाम था — रामप्यारी गुर्जर।
एक बीस साल की लड़की। सहारनपुर के एक साधारण गुर्जर परिवार की बेटी। जिसने वो कर दिखाया जो दिल्ली का सुल्तान नहीं कर सका।
ये उसकी कहानी है।

 

 

पहला अध्याय : सहारनपुर की वो बेटी — जो लड़कों जैसी थी

श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के वंशज सहारनपुर के गुर्जर परिवार में जन्मी रामप्यारी बचपन से ही निडर और हठी स्वभाव की थी।
गाँव के बच्चे खेलते — रामप्यारी दौड़ती।
बच्चियाँ गुड्डे-गुड़ियाँ खेलतीं — रामप्यारी पेड़ चढ़ती।
माँ कहती — “बेटी, घर में बैठ।”
रामप्यारी कहती — “माँ, मुझे पहलवान बनना है।”
अपनी माँ से प्रायः पहलवान बनने के लिए जिज्ञासा पूर्वक पूछा करती थी और प्रातः सांयकाल खेतों पर जाकर अथवा एकान्त स्थान में व्यायाम किया करती थी।
पुरुषों की वेशभूषा पसंद करने वाली रामप्यारी पहलवान बनना चाहती थी और प्रतिदिन अपनी माँ से इस संबंध में सवाल पूछती थी और नियमित व्यायाम करती थी। युवा होने तक रामप्यारी युद्धकौशल में भी दक्ष हो गई थी। उसकी बुद्धिमत्ता और युद्धकौशल के चर्चे आस-पास के सभी इलाकों में थे।
गाँव के बुज़ुर्ग कहते — “यह लड़की नहीं, आग है।”
और वे गलत नहीं थे।
लेकिन उस वक्त किसी को नहीं पता था कि यही आग एक दिन दुनिया के सबसे खतरनाक आक्रांता को जलाकर राख कर देगी।

दूसरा अध्याय : वो राक्षस — समरकंद का दरिंदा

अब थोड़ा उस दरिंदे के बारे में जानते हैं — जिसके सामने यह बीस साल की लड़की खड़ी होने वाली थी।
तैमूर लंग दूसरा चंगेज़ ख़ाँ बनना चाहता था। वह चंगेज़ का वंशज होने का दावा करता था, लेकिन असल में वह तुर्क था। वह लंगड़ा था, इसलिए ‘तैमूर लंग’ (लंग = लंगड़ा) कहलाता था।
तैमूर लंग इतिहास का सबसे बड़ा क्रूर और हत्यारा माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि तैमूर द्वारा की गई हत्याओं से विश्वभर की आबादी में लगभग 3 प्रतिशत की कमी आ गई थी।
तीन प्रतिशत। पूरी दुनिया की आबादी का।
उसने फारस, अफगानिस्तान और मेसोपोटामिया पर जीत के बाद सितंबर 1398 में 62 साल की उम्र में भारत पर आक्रमण किया।
तैमूर लंग ने मार्च सन् 1398 में भारत पर 92,000 घुड़सवारों की सेना से तूफानी आक्रमण कर दिया।
बानवे हज़ार घुड़सवार। साथ में पैदल सेना अलग। हाथी अलग। तोपें अलग।
18 दिसम्बर, 1398 को दिल्ली के बाहर जो निर्णायक युद्ध हुआ उसमें सुल्तान महमूद शाह तुगलक तथा मल्लू इकबाल 10 हजार घुड़सवार तथा 40 हजार पैदल सैनिकों को ही मैदान में ला सके। युद्ध में तैमूर की निर्णायक विजय हुई। सुल्तान महमूद ने तथा मल्लू इकबाल ने भाग कर दिल्ली नगर के अन्दर शरण ली। दूसरे दिन सुबह होने के पहले ही महमूद शाह और मल्लू दिल्ली शहर छोड़कर भाग चुके थे।
दिल्ली का सुल्तान भाग गया। रात के अंधेरे में। चुपके से।
और तैमूर दिल्ली में घुस आया।

तीसरा अध्याय : दिल्ली का वो काला दिन — खून की नदियाँ

दिल्ली को क्षत-विक्षत करने के उपरान्त तैमूर ने अपनी क्रूर दृष्टि हिन्दुओं और उनके तीर्थों की ओर घुमाई।
तैमूर ने दिल्ली में लाखों लोगों की हत्या कर उनके सिरों का पहाड़ बनाकर जीत का खूनी जश्न मनाया।
जी हाँ — सिरों का पहाड़।
तैमूर अपनी जीवनी में लिखता है — “थोड़े ही समय में दुर्ग के तमाम लोग तलवार के घाट उतार दिये गये। घंटे भर में दस हजार लोगों के सिर काटे गये। इस्लाम की तलवार ने काफिरों के रक्त में स्नान किया।”
यह उसने खुद अपनी किताब में लिखा।
तैमूर के शिविर में एक लाख हिन्दू कैदी थे। तैमूर ने यह देखकर कि कैदी खुश हो रहे हैं — सबकी हत्या करने का आदेश दे दिया। सबके सब काट डाले गए।
एक लाख निहत्थे कैदी। एक झटके में।
दिल्ली जल रही थी। रो रही थी। और तैमूर का अगला निशाना था — हरिद्वार।
तैमूर दिल्ली को ध्वस्त करने के बाद हरिद्वार मेले की ओर कूच करता है और हजारों श्रद्धालुओं का नरसंहार करता है।
हरिद्वार — जहाँ माँ गंगा बहती है। जहाँ लाखों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। उस पवित्र भूमि पर खून बहाना चाहता था तैमूर।
और इसी खबर ने — एक बीस साल की लड़की को — अपना भाला उठाने पर मजबूर कर दिया।

चौथा अध्याय : महापंचायत — जब हर जाति एक हो गई

तैमूर के सार्वजनिक कत्लेआम, लूट-खसोट और सर्वनाशी अत्याचारों की सूचना मिलने पर संवत् 1455 (सन् 1398) कार्तिक बदी 5 को देवपाल राजा की अध्यक्षता में हरयाणा सर्वखाप पंचायत का अधिवेशन मेरठ के गाँव टीकरी, निरपड़ा, दोगट और दाहा के मध्य जंगलों में हुआ।
जंगल के बीच एक गुप्त सभा।
मशाल की रोशनी में हजारों चेहरे। गुर्जर, जाट, राजपूत, ब्राह्मण, त्यागी, अहीर, हरिजन, वाल्मीकि — सब एक साथ। कोई जात नहीं, कोई भेद नहीं। बस एक सवाल —
“माँ भारती की रक्षा करनी है — कौन तैयार है?”
अपने देश, जाति के लिए कुछ करने का यह सुअवसर कोई भी अपने हाथ से जाने देना नहीं चाहता था। अन्ततः सभी समुदायों की सहमति से महापंचायत ने तैमूर की सेना से छापामार युद्ध लड़ने की रणनीति बनाई। इस महापंचायत सेना के ध्वज के अन्तर्गत 80,000 योद्धा शामिल हुए।
अस्सी हज़ार योद्धा। बिना किसी राजा के। बिना किसी राजकोष के। बस मातृभूमि के लिए।
मुख्य सेना के प्रमुख थे महाबली जोगराज सिंह गुर्जर और उनके सेनापति थे वीर योद्धा हरवीर सिंह गुलिया।
और महिलाओं के बारे में?
महिलाएँ फिर क्यों पीछे रहने वाली थीं? उन्हें समर्थन देने हेतु चालीस हज़ार अतिरिक्त सैनिकों की टुकड़ी तैयार कर ली गई — जिसमें सभी महिला सदस्य थीं। और उनकी सेनापति नियुक्त हुईं — रामप्यारी गुर्जर।
वह सभा में खड़ी हुई — बीस साल की वह लड़की।
जोगराज सिंह ने पूछा — “रामप्यारी, क्या तुम इस ज़िम्मेदारी को उठा सकती हो?”
रामप्यारी की आँखें आग की तरह जल रही थीं।
उसने कहा — “मैं युद्ध के मैदान में लड़ते-लड़ते अपने प्राण न्योछावर करना ही उचित समझूँगी। किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटूँगी।”
पूरी सभा गूँज उठी — “भारत माता की जय!”

पाँचवाँ अध्याय : वो चालीस हज़ार — एक असम्भव सेना

इन 40,000 महिलाओं में गुर्जर, जाट, अहीर, राजपूत, हरिजन, वाल्मीकि, त्यागी तथा अन्य वीर जातियों की वीरांगनाएँ शामिल थीं। इनमें से कई ऐसी महिलाएँ भी थीं, जिन्होंने कभी शस्त्र का मुँह भी नहीं देखा था।
ज़रा सोचिए —
एक औरत जो रोज़ सुबह खेत जाती थी, चूल्हा जलाती थी, बच्चे पालती थी — उसके हाथ में अब तलवार है। भाला है। कमान है।
वह डरी। सब डरे।
लेकिन रामप्यारी ने उन्हें डरने नहीं दिया।
रामप्यारी गुर्जर के हुंकार पर वे अपने को रोक न पाईं। अपनी मातृभूमि और अपनी संस्कृति की रक्षा हेतु देवी दुर्गा की संस्कृति से सम्बन्ध रखने वाली इन दुर्गाओं ने शस्त्र चलाने में तनिक भी संकोच नहीं किया।
रामप्यारी के साथ चार और वीरांगनाएँ थीं —
हरदाई जाट, देवी कौर राजपूत, चंद्रों ब्राह्मण और रामदाई त्यागी।
पाँच अलग-अलग जातियों की पाँच महिलाएँ — और चालीस हज़ार की एक फ़ौज।
दिन-रात अभ्यास होता। भाला फेंको, तलवार चलाओ, घोड़े पर सवार हो जाओ। थकान आती — रामप्यारी की आवाज़ आती।
“रुको मत। माँ गंगा की कसम खाई है — उसे खून से नहीं रंगने देंगे।”

 

 

छठा अध्याय : तैमूर की वापसी — और मुज़फ्फरनगर का रणक्षेत्र

15 दिन दिल्ली में रुकने के बाद तैमूर स्वदेश के लिये रवाना हो गया। 9 जनवरी 1399 को उसने मेरठ पर चढ़ाई की और नगर को लूटा तथा निवासियों को कत्ल किया।
दिल्ली लूट चुका था। अब वह हरिद्वार की ओर बढ़ रहा था — गंगाजी को अपवित्र करने, तीर्थयात्रियों को काटने।
हरिद्वार युद्ध — मेरठ से आगे मुजफ्फरनगर तथा सहारनपुर तक पंचायती सेनाओं ने तैमूरी सेना से भयंकर युद्ध किए तथा इस क्षेत्र में तैमूरी सेना के पाँव न जमने दिए।
तैमूर बढ़ रहा था — और अचानक —
सामने से एक सेना आई।
तैमूर के सेनापतियों ने दूरबीन से देखा — वे औरतें हैं।
तैमूर के सिपाही हँसे। मज़ाक उड़ाया।
“औरतें लड़ने आई हैं? आज तो मज़ा आएगा!”
वे नहीं जानते थे — आज उनके लिए काल आया है।

सातवाँ अध्याय : वो घड़ी — जब तैमूर की आँखें फटी रह गईं

रामप्यारी गुर्जर के रण-कौशल को देखकर तैमूर दाँतों के नीचे उँगली दबा गया था। उसने अपने जीवन में ऐसी महिला को इस प्रकार 40 हज़ार औरतों की सेना का मार्गदर्शन करते हुए कभी नहीं देखा था और न सुना था। तैमूर इनकी वीरता देखकर घबरा उठा था।
वह आगे था — घोड़े पर। हाथ में भाला। आँखों में आग।
तैमूर की सेना ने हमला किया।
रामप्यारी ने हुंकार भरी — और चालीस हज़ार वीरांगनाएँ टूट पड़ीं।
वीर देवियाँ अपने सैनिकों को खाद्य सामग्री एवं युद्ध सामग्री बड़े उत्साह से स्थान-स्थान पर पहुँचाती थीं। शत्रु की रसद को ये वीरांगनाएँ छापा मारकर लूटती थीं।
रसद न पहुँचने से तैमूरी सेना भूखी मरने लगी। उसके मार्ग में जो गाँव आता उसी को नष्ट करती जाती थी। तंग आकर तैमूर हरिद्वार की ओर बढ़ा।

आठवाँ अध्याय : हरवीर सिंह का वो वार — जो तैमूर कभी नहीं भूला

उप-प्रधान सेनापति हरवीर सिंह गुलिया ने अपने पंचायती सेना के पच्चीस हज़ार वीर योद्धा सैनिकों के साथ तैमूर के घुड़सवारों के बड़े दल पर भयंकर धावा बोल दिया — जहाँ पर तीरों तथा भालों से घमासान युद्ध हुआ। इसी घुड़सवार सेना में तैमूर भी था। हरवीरसिंह गुलिया ने आगे बढ़कर शेर की तरह दहाड़ कर — तैमूर की छाती में भाला मार दिया।
रुकिए।
दुनिया का सबसे खतरनाक आक्रांता। नब्बे हज़ार की सेना का मालिक। फारस, इराक, अफगानिस्तान जीतने वाला।
उसकी छाती में एक हिन्दुस्तानी योद्धा ने भाला मारा।
तैमूर यहाँ से जाने के पश्चात् इन घावों का उपचार कराता रहा। और अन्त में जब 1405 ई. में वह मरा — तो पता चला कि इन भालों के कारण ही उसके शरीर में संक्रमण फैल गया था।
यानी — भारत के इन वीरों ने तैमूर को वो जख्म दिए — जिनसे वह सात साल बाद मरा।

 

 

नौवाँ अध्याय : रामप्यारी का वो युद्ध — तैमूर की सेना में भगदड़

रामप्यारी की सेना और जोगराज की मुख्य सेना ने मिलकर एक ऐसा व्यूह रचा कि तैमूर की सेना को चैन नहीं मिला।
रामप्यारी गुर्जरी की उम्र सिर्फ 20 साल थी — लेकिन उनकी सेना ने तैमूर लंग की आर्मी को गाजर-मूली की तरह काट कर रख दिया था।
सबसे बड़ी बात ये कि इन महिलाओं ने इससे पहले कभी भी शस्त्र नहीं चलाया था — लेकिन राम प्यारी गुर्जरी ने सबको शस्त्र चलाने की ट्रेनिंग दी और जल्द ही सेना को जबरदस्त हौसले के साथ तैयार कर दिया था।
तैमूर इनकी वीरता देखकर घबरा उठा था। तैमूर ने अपने जीवन में ऐसी महिला को इस प्रकार 40 हज़ार औरतों की सेना का मार्गदर्शन करते हुए कभी नहीं देखा था और न सुना था।
वह तैमूर — जिसने बगदाद जलाया, दमिश्क रुलाया, दिल्ली कंपाई — वह एक हिन्दुस्तानी लड़की को देखकर घबरा गया।
इस वीरांगना के युद्धकौशल से डर कर तैमूर लंगड़े को भारत विजय का अभियान छोड़कर भागना पड़ा।
भागना पड़ा।
दुनिया का सबसे खतरनाक हमलावर — भागा।

दसवाँ अध्याय : ईरानी इतिहास की गवाही

यह सिर्फ भारतीय दावा नहीं।
ईरानी इतिहासकार शरीफुद्दीन अली यजीदी द्वारा रचित **’जफरनामा’** में इस युद्ध का उल्लेख भी किया गया है।
मनोशी सिंह रावल की पुस्तक *सैफ्रन स्वोर्ड्स’ (Saffron Swords) में भी यह जिक्र मिलता है।
अर्थात लेखिका ने भी माना — यह भारतीय प्रतिरोध की सबसे बड़ी कहानी है।

ग्यारहवाँ अध्याय : विस्मरण की त्रासदी

भारत के उपराष्ट्रपति ने मार्च 2023 में ट्वीट किया — “रामप्यारी गुर्जर ने 40 हज़ार की सेना बना कर तैमूर से लोहा लिया — पर हमारे इतिहास में इनका नाम नहीं मिलता।”
उपराष्ट्रपति को इतिहास की किताब में यह नाम नहीं मिला।
देश की सबसे बड़ी विडम्बना यह रही कि ऐसी वीरांगनाओं और वीरों की अमर गाथाओं को हमसे छुपाया गया। रामप्यारी गुर्जर जैसी लाखों वीर और देशभक्त महिलाओं को देश के इतिहास से मिटा दिया गया।
क्यों मिटाया गया?
क्योंकि वह गुर्जर थी। पिछड़ी जाति थी। औरत थी। किसी राजघराने से नहीं थी।
इतिहास ने चुना — राजाओं को लिखना। लेकिन जो लड़ाई असली थी — जो जनता ने लड़ी — उसे भुला दिया।

उपसंहार : माँ भारती की वो बेटी — जो कभी नहीं भूलनी चाहिए

1405 ईस्वी में इस युद्ध में पड़े घावों की वजह से तैमूर की मृत्यु हो गई।
वह तैमूर — जिसे दुनिया अजेय मानती थी — भारत की मिट्टी में लगे ज़ख्मों से मरा।
और उन ज़ख्मों को देने में एक बीस साल की लड़की का हाथ था।
रामप्यारी गुर्जर को न पुरस्कार मिला, न पदक। न उनके नाम की कोई सड़क है, न कोई पुस्तक में उनका पूरा अध्याय। न पाठ्यक्रम में उनका नाम।
लेकिन सहारनपुर की वह मिट्टी जानती है।
मुज़फ्फरनगर के वे खेत जानते हैं।
हरिद्वार की गंगा जानती है — कि एक बार एक लड़की ने उसे बचाया था। अपनी जान देने की कसम खाकर।
वीरांगना रामप्यारी गुर्जर — भारत माँ की वह बेटी, जिसे इतिहास ने भुलाया — पर जिसे हम कभी नहीं भूल सकते।
“जो इतिहास की किताबों में नहीं — वो दिलों में जिंदा रहती है।”
🙏 शत-शत नमन वीरांगना रामप्यारी गुर्जर को।
🙏 और उन चालीस हज़ार अनाम माताओं-बहनों को — जो उनके साथ मैदान में उतरी थीं।

यह भी आपको जरूर पसंद आएगा।

इतिहास के अनदेखे योद्धा – 1 : ⚔️ बाजीकाका पासलकर – मराठा स्वराज्य के पहले कमांडर-इन-चीफ

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Click to share on X (Opens in new window) X
Tags: इतिहास के अनदेखे योद्धातैमूर लंगवीरांगना रामप्यारी गुर्जर
Previous Post

खत टंचाई, वाढत्या किंमती ; युरोपातील क्रॉप पॅटर्न बदलाची चिन्हे.!

Next Post

30 आणि 31 मार्च अवकाळीचे सावट ; जिल्हावार अंदाज

Next Post
30 आणि 31 मार्च अवकाळीचे सावट ; जिल्हावार अंदाज

30 आणि 31 मार्च अवकाळीचे सावट ; जिल्हावार अंदाज

ताज्या बातम्या

राज्यात पावसाचा जोर वाढणार..

राज्यात पावसाचा जोर वाढणार..

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 24, 2026
0

मान्सून 2/3 दिवसात पुन्हा सक्रिय होण्याची शक्यता

मान्सून 2/3 दिवसात पुन्हा सक्रिय होण्याची शक्यता

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 20, 2026
0

मान्सूनच्या वाटचालीस अनुकूल बदलांची चिन्हे; 20 जूननंतर शेतकऱ्यांसाठी येणार खुशखबर!

मान्सूनच्या वाटचालीस अनुकूल बदलांची चिन्हे; 20 जूननंतर शेतकऱ्यांसाठी येणार खुशखबर!

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 18, 2026
0

मान्सूनची सद्यस्थिती चिंताजनक; जून महिन्यात 32 टक्क्यांची तूट

मान्सूनची सद्यस्थिती चिंताजनक; जून महिन्यात 32 टक्क्यांची तूट

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 16, 2026
0

शेतीचा पाणीपुरवठा तातडीने बंद करण्याचा शासन आदेश

शेतीचा पाणीपुरवठा तातडीने बंद करण्याचा शासन आदेश

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 16, 2026
0

मान्सूनची महाराष्ट्रात वाटचाल सुरू; येत्या 4-5 दिवसांत पावसाचा अंदाज; काही भागांत उष्णतेच्या लाटेचा इशारा

मान्सूनची महाराष्ट्रात वाटचाल सुरू; येत्या 4-5 दिवसांत पावसाचा अंदाज; काही भागांत उष्णतेच्या लाटेचा इशारा

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 15, 2026
0

जूनच्या शेवटच्या आठवड्यात महाराष्ट्रात मुसळधार पावसाची शक्यता

जूनच्या शेवटच्या आठवड्यात महाराष्ट्रात मुसळधार पावसाची शक्यता

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 11, 2026
0

राज्यात मान्सूनच्या पुढील वाटचालीस अत्यंत अनुकूल वातावरण

राज्यात मान्सूनच्या पुढील वाटचालीस अत्यंत अनुकूल वातावरण

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 10, 2026
0

राष्ट्रीय महत्त्वाचा बाजार कायदा; सक्षम पणन सुधारणांचा नवा अध्याय

राष्ट्रीय महत्त्वाचा बाजार कायदा; सक्षम पणन सुधारणांचा नवा अध्याय

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 10, 2026
0

आजचे हवामान, 8 जून: 15 जिल्ह्यांत ‘हाय अलर्ट’

आजचे हवामान, 8 जून: 15 जिल्ह्यांत ‘हाय अलर्ट’

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 8, 2026
0

तांत्रिक

पॉवर वीडर : तण व्यवस्थापनासाठी प्रभावी यंत्र

पॉवर वीडर : तण व्यवस्थापनासाठी प्रभावी यंत्र

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
March 6, 2026
0

स्पायरल सेपरेटर

मळणीनंतर सोयाबीन व तूर साफसफाईसाठी- स्पायरल सेपरेटर

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
December 22, 2025
0

प्रिसिजन फार्मिंग

काय आहे प्रिसिजन फार्मिंग ? ; जाणून घ्या…

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
July 3, 2025
0

पार्सली भाजी काय आहे ?

200 रुपये किलोची पार्सली भाजी काय आहे ? जाणून घ्या…

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
May 20, 2025
0

जगाच्या पाठीवर

राज्यात पावसाचा जोर वाढणार..

राज्यात पावसाचा जोर वाढणार..

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 24, 2026
0

मान्सून 2/3 दिवसात पुन्हा सक्रिय होण्याची शक्यता

मान्सून 2/3 दिवसात पुन्हा सक्रिय होण्याची शक्यता

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 20, 2026
0

मान्सूनच्या वाटचालीस अनुकूल बदलांची चिन्हे; 20 जूननंतर शेतकऱ्यांसाठी येणार खुशखबर!

मान्सूनच्या वाटचालीस अनुकूल बदलांची चिन्हे; 20 जूननंतर शेतकऱ्यांसाठी येणार खुशखबर!

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 18, 2026
0

मान्सूनची सद्यस्थिती चिंताजनक; जून महिन्यात 32 टक्क्यांची तूट

मान्सूनची सद्यस्थिती चिंताजनक; जून महिन्यात 32 टक्क्यांची तूट

by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
June 16, 2026
0

मुख्य कार्यालय

ॲग्रोवर्ल्ड
दुसरा मजला,बालाजी संकुल,
खाँजामिया चौक, जळगाव 425001

संपर्क :  9130091621/22/23/24/25

विभागीय कार्यालय- पुणे

ॲग्रोवर्ल्ड
बी- 507, अवंती अपार्टमेंट, सर्वे.नं. 79/2, भुसारी कॉलनीच्या डाव्या बाजूला, पौंड रोड, कोथरूड डेपो, पुणे- 411038

संपर्क : 9130091633

विभागीय कार्यालय- नाशिक

ॲग्रोवर्ल्ड

तळमजला,  प्रतिक अपार्टमेंट, गणपती मंदिर शेजारी,  सावरकर नगर, गंगापूर रोड, नाशिक- 422222

संपर्क :  9130091623

विभागीय कार्यालय- संभाजीनगर (औरंगाबाद )

ॲग्रोवर्ल्ड

शॉप क्र : 120,
कैलाश मार्केट, पदमपुरा सर्कल,
रेल्वे स्टेशन रोड,
संभाजीनगर (औरंगाबाद ) – 431005
संपर्क : 9175050178

  • Cart
  • Checkout
  • Home
  • My account
  • Services
  • Shop

© 2020.

No Result
View All Result
  • होम
  • हॅपनिंग
  • शासकीय योजना
  • पशुसंवर्धन
  • ग्रामविकास योजना
  • यशोगाथा
  • तंत्रज्ञान / हायटेक
  • तांत्रिक
  • हवामान अंदाज
  • कृषीप्रदर्शन
  • कार्यशाळा
  • इतर
    • वंडरवर्ल्ड
    • महिला व बालकल्याण
    • आरोग्य टिप्स

© 2020.

EnglishEnglish