विक्रांत पाटील
मुंबई – मध्य प्रदेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया है। यह पहल राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का एक महात्वाकांक्षी रोडमैप है। इस विजन का मूल उद्देश्य केंद्रीय बजट 2026-27 के व्यापक आवंटनों को राज्य की विशिष्ट योजनाओं के साथ एकीकृत करना है, ताकि उत्पादकता और किसान कल्याण के नए मानक स्थापित किए जा सकें।
“राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कृषि क्षेत्र के लिए ₹27,000 करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया है। यह विशाल निवेश आधुनिक नवाचारों और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा, जिससे खेती एक सम्मानजनक और लाभप्रद व्यवसाय बन सके।” इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार की तकनीकी सहायता और डिजिटल बुनियादी ढांचे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।

डिजिटल और तकनीकी बुनियादी ढांचा: खेती का भविष्य
एक शिक्षाविद् के रूप में यह समझना आवश्यक है कि भविष्य की खेती केवल हल और बीज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे’ (Digital Public Infrastructure) पर टिकी है। सरल शब्दों में, यह वैसी ही तकनीक है जैसे लेन-देन के लिए UPI, जिसे विशेष रूप से किसानों के सार्वजनिक हित के लिए बनाया गया है।
भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR): यह एक बहुभाषी AI-आधारित उपकरण है। इसका मुख्य प्रभाव लागत में कमी लाना है। यह उपकरण स्थानीय किसान को उसकी अपनी भाषा में मिट्टी के स्वास्थ्य और सटीक मौसम डेटा के आधार पर सलाह देता है, जिससे उर्वरक और पानी की बर्बादी कम होती है और निवेश की लागत (Input Cost) घटती है।
एग्रीस्टैक पोर्टल (AgriStack): यह पोर्टल किसानों के लिए ऋण (Credit), बीमा और सीधे बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने वाला एक एकीकृत मंच है। इसका लाभ यह है कि किसान बिना किसी बिचौलिये के सीधे पारदर्शी वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
इन अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों की मदद से किसान अब उन विशेष फसलों और उत्पादों की खेती की ओर बढ़ सकते हैं, जिनमें मध्य प्रदेश को वैश्विक बढ़त हासिल है।
उच्च-मूल्य कृषि और आत्मनिर्भरता: फसलों पर ध्यान
राज्य की कृषि नीति अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि विविधीकरण और बाजार की मांग पर केंद्रित है।
तिलहन (Oilseeds): सोयाबीन क्षेत्र पर विशेष जोर – ‘सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (SOPA) के सहयोग से उत्पादकता आधारित प्रोत्साहन।
चंदन (Sandalwood): केंद्र-राज्य भागीदारी – राज्य की जलवायु विविधता (Climate Diversity) का लाभ उठाकर किसानों के लिए आय का नया स्रोत।
बागवानी (Horticulture): रसद और लॉजिस्टिक्स में सुधार – कोल्ड चेन और परिवहन सुविधाओं से फसल कटाई के बाद के नुकसान में कमी और बेहतर मूल्य।
फसलों के इस विविधीकरण और आधुनिकीकरण को समर्थन देने के लिए एक सुदृढ़ वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार किया गया है।

वित्तीय सहायता और सब्सिडी: किसानों के लिए सुरक्षा कवच
नीतिगत स्तर पर, खेती को जोखिम मुक्त बनाने के लिए सरकार ने बड़े वित्तीय प्रावधान किए हैं, जो किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाते हैं:
उर्वरक सब्सिडी: केंद्र सरकार द्वारा आवंटित ₹1.70 लाख करोड़ का लाभ मध्य प्रदेश के किसानों को सस्ती दरों पर खाद की निरंतर आपूर्ति के रूप में मिलेगा।
कृषोन्नति योजना: इस योजना में ₹4,400 करोड़ की वृद्धि की गई है, जो उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को सुलभ बनाएगी।
खरीद सहायता (Procurement Support): राज्य सरकार ने फसल खरीद एजेंसियों को ₹2,000 करोड़ आवंटित किए हैं, ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद प्रक्रिया सुचारू रहे और किसानों को समय पर भुगतान मिल सके।
वित्तीय सुरक्षा के इन उपायों के साथ-साथ, कृषि की आधारशिला यानी जल प्रबंधन पर भी अभूतपूर्व ध्यान दिया गया है।

सिंचाई और जल प्रबंधन: मध्य प्रदेश की जीवन रेखा
सिंचाई सुविधाओं का विस्तार इस पूरी नीति का केंद्र बिंदु है। इसमें ‘केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना’ को फ्लैगशिप प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है।
1. केन-बेतवा लिंक परियोजना: यह ₹44,605 करोड़ की एक राष्ट्रीय परियोजना है, जिसका लक्ष्य मध्य प्रदेश के 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करना है।
2. वर्ष 2026 के मील के पत्थर: इस वर्ष मुख्य ध्यान दौधन बांध (Daudhan Dam) के निर्माण और 221 किमी लंबी लिंक नहर के कार्य को गति देने पर है।
3. लाभान्वित जिले: इससे बुंदेलखंड और आसपास के 10 जल-संकट वाले जिलों—पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, निवाड़ी और रायसेन की तस्वीर बदलेगी।
4. सोनडवा लिफ्ट सिंचाई परियोजना: अलीराजपुर क्षेत्र के लिए ₹1,700 करोड़ की यह योजना 55,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की प्यास बुझाएगी।
5. नीतिगत बदलाव* (MGNREGS): एक महत्वपूर्ण नीतिगत परिवर्तन के तहत अब MGNREGS निधि का 65% हिस्सा अनिवार्य रूप से जल संरक्षण कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
6. जल जीवन मिशन: राज्य में पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ₹17,136 करोड़ का अलग से आवंटन किया गया है।
7. विरासत और आधुनिकता: सरकार बुंदेलखंड में चंदेलकालीन ऐतिहासिक तालाबों का पुनरुद्धार कर रही है, जो पारंपरिक जल संचयन को आधुनिक सिंचाई तंत्र से जोड़ता है।
यह जल सुरक्षा न केवल फसलों के लिए, बल्कि पशुधन के स्वास्थ्य और चारे की उपलब्धता के लिए भी एक अनिवार्य पूर्व शर्त है।
पशुपालन और वित्तीय राहत: एक समग्र दृष्टिकोण
मध्य प्रदेश का लक्ष्य भारत की ‘दुग्ध राजधानी’ (Milk Capital) बनना है, जिसके लिए कृषि और पशुपालन को एक साथ विकसित किया जा रहा है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना: इस योजना के जरिए राज्य का लक्ष्य राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी 9% से बढ़ाकर 20% करना है।
समग्र विकास: सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से चारे की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे डेयरी क्षेत्र को सीधा लाभ होगा।

वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने ₹84 करोड़ का दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) माफ कर दिया है। यह साधारण कर्ज माफी से अलग है; इसका मुख्य उद्देश्य 35 लाख किसानों की ‘ऋण पात्रता’ (Creditworthiness) को बहाल करना है, ताकि वे बिना किसी पुराने बोझ के भविष्य में फिर से बैंक ऋण प्राप्त कर सकें।
केंद्र और राज्य का तालमेल
मध्य प्रदेश के कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल परिव्यय (Combined Outlay) लगभग ₹58,257 करोड़ तक पहुंच गया है। यह राशि केंद्र और राज्य की साझा शक्ति को दर्शाती है। जहाँ केंद्रीय बजट ने इस ‘कृषि वर्ष’ के लिए वित्तीय आधार और तकनीकी ढांचा तैयार किया है, वहीं फरवरी के मध्य में शुरू होने वाला मध्य प्रदेश का राज्य बजट सत्र इन योजनाओं के वास्तविक कार्यान्वयन और जिला-वार वितरण की अंतिम रूपरेखा पेश करेगा।
एक उभरते हुए नीति विश्लेषक के रूप में, यह स्पष्ट है कि यह रणनीतिक तालमेल मध्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता के एक नए युग में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।














