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MBA की डिग्री और केले के बिस्किट : कैसे बुरहानपुर के एक किसान के बेटे ने बनाया सफल स्टार्टअप?

टीम ॲग्रोवर्ल्ड by टीम ॲग्रोवर्ल्ड
January 31, 2026
in यशोगाथा
0
केले के बिस्किट
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आज के दौर में जहां कई युवा अच्छी डिग्री हासिल करने के बाद भी नौकरी की तलाश में संघर्ष करते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी राह खुद बनाते हैं। यह कहानी है बुरहानपुर की उपजाऊ मिट्टी से निकले एक ऐसे नौजवान की, जिसके हाथों में MBA की डिग्री थी और आँखों में कॉर्पोरेट दुनिया का सपना नहीं, बल्कि अपने खेत के केलों को एक ब्रांड बनाने का जुनून था। धमनगांव के रहने वाले किसान के बेटे कपिल सावले ने किसी कॉर्पोरेट नौकरी का इंतज़ार करने के बजाय अपने क्षेत्र की खेती से जुड़ी एक अनोखे बिज़नेस मौके को पहचाना।

यह कहानी सिर्फ केले से बने बिस्किट की नहीं है। यह नवाचार, हिम्मत और अपने आस-पास मौजूद संसाधनों से अवसर पैदा करने की कहानी है। कपिल की यात्रा हमें सिखाती है कि कैसे एक साधारण विचार को सही रणनीति और मेहनत के साथ एक सफल बिज़नेस में बदला जा सकता है। आइए, उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा से मिले महत्वपूर्ण सबक को समझते हैं।

 

 

सफलता का गुप्त नुस्खा – केले का आटा और मोटा अनाज
स्नैक्स के भीड़-भरे बाज़ार में अपनी जगह बनाना आसान नहीं है। यहाँ सफलता का पहला नियम है—कुछ अलग और बेहतर पेश करना। कपिल सावले का तुरुप का इक्का था एक ऐसा सीक्रेट नुस्खा जो स्वाद और सेहत का संगम था: केले के आटे और मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसे बाजरा, मक्का और ज्वार को मिलाकर बिस्किट बनाना। यह अपने आप में एक बड़ी बात थी क्योंकि:

स्वास्थ्यवर्धक विकल्प: यह बिस्किट पूरी तरह से केमिकल-मुक्त हैं, जो उन्हें बाज़ार में मौजूद अन्य विकल्पों से अलग खड़ा करता है।
स्थानीय उत्पाद को मूल्य: उन्होंने केले का उपयोग कर स्थानीय कृषि उपज को मूल्यवान बनाया, जिससे किसानों को भी फायदा मिलता है।
लंबी शेल्फ लाइफ: इन बिस्किट्स की शेल्फ लाइफ छह महीने की है, जो ग्राहकों में विश्वास पैदा करती है और वितरण को आसान बनाती है।

उन्होंने अपने उत्पाद की कीमत भी बहुत सोच-समझकर रखी। आज उनके बिस्किट दो पैकिंग में उपलब्ध हैं:

• 30 ग्राम का पैकेट: ₹20
* 200 ग्राम का पैकेट: ₹120

यह अनोखा और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद ही वह नींव थी जिस पर उन्होंने अपने बिज़नेस की इमारत खड़ी की। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उन्होंने यह नींव तब रखी, जब दुनिया अपनी डिग्रियाँ पूरी होने का इंतज़ार करती है—यानी, अपनी पढ़ाई के दौरान।

क्लासरूम से कंपनी तक का सफर

आम तौर पर यही माना जाता है कि बिज़नेस शुरू करने से पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर लेनी चाहिए। लेकिन कपिल की कहानी इस पारंपरिक सोच को चुनौती देती है। उन्होंने उद्यमिता के साथ अकादमिक ज्ञान को जोड़ने का एक सफल उदाहरण पेश किया।

कपिल ने अपने स्टार्टअप की योजना तब बनाई जब वह अपनी MBA की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रिसर्च करने के लिए अपने पढ़ाई के समय का सदुपयोग किया और केले के बिस्किट का यह अनूठा बिज़नेस आईडिया विकसित किया। कपिल ने साबित किया कि आज के दौर में अकादमिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव दो अलग-अलग रास्ते नहीं, बल्कि एक ही सफ़र के दो पहिये हैं। क्लासरूम में सीखी गई मैनेजमेंट की थ्योरी को वह अगले ही दिन अपनी छोटी सी फैक्ट्री में परख रहे थे, जिससे उनकी सीख और बिज़नेस दोनों तेज़ी से मज़बूत हुए।

इस दृष्टिकोण का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि वह अपनी मैनेजमेंट की पढ़ाई से सीखे गए सिद्धांतों को वास्तविक समय में लागू कर पा रहे थे। इससे उन्हें बिना किसी देरी के ज़मीन पर अपना बिज़नेस खड़ा करने में मदद मिली। हालांकि, यह साहसिक कदम उन्होंने अकेले नहीं उठाया; इसके पीछे एक मज़बूत सहारा था।

पहला निवेशक – एक पिता का विश्वास

किसी भी नए उद्यमी के लिए एक मज़बूत सपोर्ट सिस्टम अमूल्य होता है। अक्सर पहला और सबसे महत्वपूर्ण “निवेश” पैसों का नहीं, बल्कि परिवार के विश्वास और प्रोत्साहन का होता है। कपिल की कहानी में यह भूमिका उनके पिता प्रकाश सावले ने निभाई, जो केंद्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त एक शिक्षक हैं और अब खेती-किसानी से भी जुड़े हैं।

जब कपिल ने अपने पिता को यह आईडिया बताया, तो शुरुआत में उन्हें थोड़ी हिचक हुई। लेकिन कपिल के दृढ़ विश्वास और गहरी रिसर्च को देखकर उन्होंने न केवल बेटे को “हरी झंडी” दी, बल्कि उनका पूरा समर्थन भी किया। इसी भरोसे ने कपिल को आगे बढ़ने का हौसला दिया।

कपिल ने यह बिज़नेस लगभग 10 से 15 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया। यह राशि उन्होंने बैंक से मिले लोन और अपने परिवार के सहयोग से जुटाई, जो उनके आइडिया पर अटूट विश्वास को दर्शाता है। परिवार से मिले इसी शुरुआती समर्थन और पूंजी ने उनके बिज़नेस के विकास और विस्तार की मज़बूत नींव रखी।

 

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गांव की रसोई से डिजिटल सुपरमार्केट तक

आज के डिजिटल युग में किसी भी बिज़नेस को तेजी से बढ़ाने के लिए एक आधुनिक वितरण रणनीति अनिवार्य है। कपिल ने इसी रणनीति को अपनाकर अपने बिज़नेस को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने शुरुआत बुरहानपुर के स्थानीय बाज़ार से की और धीरे-धीरे महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में अपनी पहुंच बनाई।

लेकिन कपिल का असली मास्टरस्ट्रोक था स्थानीय बाज़ार की सीमाओं को लांघकर डिजिटल सुपरमार्केट में दस्तक देना। Zepto, Blinkit, और Nature’s Basket जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर अपने प्रोडक्ट को लिस्ट करवाकर उन्होंने एक ही कदम में अपने गाँव के बिस्किट को मुंबई और दिल्ली के ग्राहकों के किचन तक पहुँचा दिया। यह एक सोची-समझी रणनीति थी जिसने उनके बिज़नेस को लोकल से नेशनल बना दिया।

यह व्यावसायिक सफलता सिर्फ मुनाफे तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसका स्थानीय समुदाय पर भी गहरा सामाजिक प्रभाव पड़ा।

 

 

सिर्फ़ एक बिज़नेस नहीं, रोजगार देने का मिशन

एक नौकरी खोजने वाले और नौकरी देने वाले की सोच में बहुत बड़ा अंतर होता है। कपिल की यात्रा एक उद्यमी की उस मानसिकता का शक्तिशाली उदाहरण है जो व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ सामुदायिक उत्थान पर भी केंद्रित होती है। कपिल बताते हैं कि स्टार्टअप शुरू करने से पहले वह खुद ‘दूसरे के यहां पर नौकरी करते थे’। लेकिन अपने आइडिया पर विश्वास कर उन्होंने सुरक्षित नौकरी छोड़कर उद्यमिता की अनिश्चित राह चुनी।

आज उनका यह सपना साकार हो चुका है। उनका स्टार्टअप अपने गांव के 10 से 15 लोगों को स्थायी रोज़गार दे रहा है, जिनमें विशेष रूप से वे महिलाएँ भी शामिल हैं जो पैकेजिंग और अंतिम उत्पाद की देखरेख का महत्वपूर्ण काम संभालती हैं।

कपिल दूसरे युवाओं को भी यही सलाह देते हैं। उनका संदेश सीधा और स्पष्ट है: “आज का युवा सोशल मीडिया और मोबाइल में समय बर्बाद कर रहा है, जबकि अगर उसी समय का इस्तेमाल किसी बिजनेस आइडिया को ढूंढने में करे, तो वह खुद का मालिक बन सकता है।”

इस तरह, उनके दृष्टिकोण ने न केवल उनकी अपनी, बल्कि उनके समुदाय के कई अन्य लोगों की ज़िंदगी भी बदल दी है।

आधुनिक सफलता की रेसिपी

कपिल सावले की कहानी सिर्फ एक सफल स्टार्टअप की कहानी नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उनकी यात्रा से मिले सबक स्पष्ट हैं: स्थानीय संसाधनों को पहचानें, उन्हें आधुनिक रणनीति के साथ जोड़ें, परिवार के समर्थन को अपनी ताकत बनाएं और एक ऐसा लक्ष्य रखें जो सिर्फ मुनाफा कमाने से कहीं बड़ा हो।

कपिल ने बुरहानपुर के केले को अपनी पहचान बना दिया। सोचिए, आपके शहर, गाँव या घर की रसोई में ऐसी कौन सी चीज़ है, जो दुनिया के लिए अगला बड़ा ब्रांड बनने का इंतज़ार कर रही है?

 

 

 

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