1972 और 2015 के सूखे जैसी भयावह स्थिति महाराष्ट्र मे इस साल नहीं; मराठवाड़ा को छोड़कर बांधों में पर्याप्त जल भंडार..!

मुंबई : सोशल मीडिया पर “महाराष्ट्र में पानी खत्म हो गया” जैसी अधूरी, सतही और सनसनीखेज खबरें फैलाकर लोगों में डर पैदा किया जा रहा है। लेकिन आधिकारिक आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। इस साल अल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून में 19 प्रतिशत की कमी जरूर रही, लेकिन राज्य के बांधों की स्थिति 2015 या 1972 के भीषण सूखे जैसी बिल्कुल नहीं है। बल्कि, मराठवाड़ा को छोड़कर महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में पर्याप्त जल भंडार उपलब्ध है। राज्य के विभिन्न विभागों की तुलनात्मक स्थिति भी दी गई है।
जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में राज्य के कुल बांधों में जल भंडारण 72.1% है। 2015 में इसी समय यह भंडारण केवल 60 से 62% था। बड़े बांधों की स्थिति में यह अंतर और भी स्पष्ट दिखाई देता है। 2015 में मृत भंडारण स्तर तक पहुंच चुका जायकवाड़ी बांध आज 79.79% भरा हुआ है, जबकि राज्य का सबसे बड़ा कोयना बांध 95.5% (100 टीएमसी) तक भर चुका है। 2015 में कोयना बांध का जलस्तर घटकर 15.34% रह गया था। वर्तमान में कोंकण विभाग में 88.9%, पुणे में 82.9% और नासिक में 80.3% जल भंडारण है। वहीं, मुंबई के सभी सातों बांध 94.57% तक भरे हुए हैं। इनमें विहार बांध 99.95% और मध्य वैतरणा बांध 99.77% भरा हुआ है। 2015 की तुलना में यह जल भंडारण लगभग दोगुना है। इसका कारण यह है कि इस साल भले ही कुल बारिश कम हुई, लेकिन जुलाई और अगस्त में बहुत तेज बारिश होने से बड़े बांध महज एक महीने में लबालब भर गए और ओवरफ्लो होने लगे।
दूसरी ओर, प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। राज्य सरकार ने पहले ही 305 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है और फसल नुकसान का पंचनामा 80% पूरा हो चुका है। दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में सहायता राशि जमा करने की योजना है। पुणे जिले ने तो अगस्त 2027 तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल ऑडिट किया है और पीने के पानी को प्राथमिकता दी है। गोसी खुर्द जैसे बांध के 100% भर जाने से विदर्भ में रबी की फसलों को राहत मिलने की उम्मीद है सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों को फीस में छूट, लाडली बहनों को सहायता और किसानों को आर्थिक संबल देने जैसे कई उपायों के माध्यम से राहत पहुंचाने की तैयारी है।
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मराठवाड़ा अपवाद — यहां ध्यान देने की जरूरत
इस सकारात्मक तस्वीर का एकमात्र अपवाद मराठवाड़ा है। यहां स्थिति 2015 जैसी ही गंभीर बनी हुई है। हालांकि, इस विभाग में औसत जल भंडारण 42.7% दिखाई दे रहा है, लेकिन छोटे और मध्यम बांधों में केवल 5 से 17% पानी बचा है। लातूर के 8 बांधों में 5%, धाराशिव के 17 बांधों में 5% और बीड के 17 बांधों में 11% जल भंडारण है। मांजरा बांध में 9%, लोअर दुधना में 16% और माजलगांव बांध में 23% पानी है, जबकि सीना कोलेगांव बांध पूरी तरह सूखा पड़ा है। पानी की इस गंभीर कमी के कारण मराठवाड़ा में 374 पानी के टैंकर शुरू करने पड़े हैं।
संक्षेप में कहें तो राज्य में सूखे की स्थिति जरूर है, लेकिन आज हालात इतने भयावह नहीं हैं कि 1972 की तरह लोगों को सूखी रोटी बांटनी पड़े या 2015 में लातूर तक ट्रेन से पानी पहुंचाना पड़े। राज्य में पानी उपलब्ध है और उसके प्रबंधन की व्यवस्था भी है। ऐसे में अफवाहों से दूर रहकर पानी का किफायत से इस्तेमाल करना और मराठवाड़ा के किसानों की मदद के लिए आगे आना ही इस साल का सही रास्ता है।
2015 और 2026 — दोनों सूखे के साल, लेकिन बांधों के जलस्तर में जमीन-आसमान का अंतर
मुंबई – 2015 और 2026, दोनों ही सूखे के साल हैं, लेकिन बांधों के जलस्तर में बड़ा अंतर है। 2015 की तुलना में 2026 में राज्य की स्थिति काफी बेहतर है। हालांकि, मराठवाड़ा में स्थिति लगभग उतनी ही गंभीर बनी हुई है।
प्रमुख बांधों की तुलनात्मक समीक्षा
(आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार)
बांध / विभाग | अक्टूबर 2015 (भीषण सूखा) | अक्टूबर 2026 (वर्तमान स्थिति) | निष्कर्ष
* राज्य का कुल जल भंडारण | 2015 – लगभग 60–62% (1972 के बाद सबसे कम) | 2026 – 72.1% | राज्य स्तर पर 2026 की स्थिति 2015 की तुलना में 10–12% बेहतर है।
जलगांव – अक्टूबर 2015 की तुलना में इस साल जल भंडारण की स्थिति
अक्टूबर 2015: गिरना 14%, हतनूर 25%, सुकी 35%, बोरी 0% (शून्य)
अक्टूबर 2026: गिरना 99.23%, हतनूर 100%, सुकी 101.28%, बोरी 100.30% (लबालब)
* मराठवाड़ा विभाग | 2015 – केवल 10–12%, कई बांध 0% पर | 2026 – 42.7% | आंकड़ा अधिक दिखाई देता है, लेकिन छोटे बांध आज भी केवल 5–17% तक ही भरे हैं।
* जायकवाड़ी (पैठण) | 2015 – 4% से घटकर मृत भंडारण स्तर तक पहुंच गया था। इसी वजह से लातूर में पानी पहुंचाने के लिए वॉटर ट्रेन चलानी पड़ी थी। | 2026 – 79.79% उपयोगी जल भंडारण, बाद में 75% पर | नासिक और अहिल्यानगर में हुई बारिश के कारण जायकवाड़ी बांध भर पाया।
* कोयना (राज्य का सबसे बड़ा बांध) 2015 – अगस्त 2015 में जल भंडारण 70% से नीचे आ गया था। मई महीने में यह घटकर 15.34% रह गया था 2026 – बांध 95.5% तक भर चुका है। इसकी कुल क्षमता 105.2 टीएमसी है, जिसमें से 100 टीएमसी पानी जमा है। इस वर्ष पश्चिम महाराष्ट्र को बड़ी राहत मिली है।
* पुणे–नासिक–कोंकण (अक्टूबर के अंत में जल भंडारण) | 2015 – पुणे विभाग 55–60%, कोंकण 70% | 2026 – पुणे विभाग 88.9%, कोंकण 89%, नासिक 92% | उत्तर और मध्य महाराष्ट्र तथा पश्चिमी महाराष्ट्र में पर्याप्त पानी उपलब्ध है।
* मुंबई के 7 बांध | 2015 में 85–90% | इस साल 94.57% (विहार 99.95%, वैतरणा 99.77%) | राजधानी मुंबई में पानी की कमी को लेकर फिलहाल चिंता की स्थिति नहीं है।
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इसका क्या मतलब है?
2015 में बारिश कम होने के कारण बांध भर ही नहीं पाए थे। 2026 में बारिश कम जरूर हुई, लेकिन जुलाई-अगस्त में बहुत तेज बारिश हुई। इसके कारण कोयना, जायकवाड़ी, गिरना, भातसा और गोसी खुर्द जैसे बड़े बांध महज एक महीने में 100% तक भर गए, लेकिन बारिश का पानी अपेक्षा के अनुसार जमीन में नहीं समा पाया। इसी वजह से खेती को हुआ नुकसान 2015 जैसी स्थिति का आभास कराता है, लेकिन पीने के पानी की किल्लत 2015 जितनी गंभीर होने के कोई संकेत नहीं हैं। इसके अलावा, सरकारी स्तर पर जल ऑडिट के जरिए स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने की योजना है।
मराठवाड़ा के लिए स्थिति नहीं बदली
2015 में जिस तरह लातूर और धाराशिव के 25 मध्यम बांधों में केवल 0–5% पानी बचा था, वैसी ही स्थिति आज भी बनी हुई है। लातूर के 8 बांधों में केवल 5%, धाराशिव के 17 बांधों में 5% और बीड के 17 बांधों में 11% जल भंडारण है। इसका मतलब है कि बाकी पूरे महाराष्ट्र को राहत मिली है, लेकिन मराठवाड़ा एक बार फिर 2015 जैसे सूखे की दहलीज पर खड़ा है।
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